मैं सुबह उठता हूँ, चाय बनाता हूँ और सबसे पहले अपना फोन चेक करता हूँ। बैंक बैलेंस नहीं, सोशल मीडिया नहीं, बल्कि vavada app खोलता हूँ। मेरे लिए यह कोई शगल नहीं है, यह मेरा ऑफिस है। मैं पिछले छह साल से प्रोफेशनल प्लेयर हूँ। लोग समझते हैं कि जुआरी लकी होते हैं या फिर वे सब कुछ गंवा देते हैं। असलियत में, हम प्रोफेशनल लोग बिल्कुल अलग तरह से सोचते हैं। हम किस्मत के भरोसे नहीं बैठते, हम गणित के भरोसे बैठते हैं।
मुझे याद है जब मैंने पहली बार इस ऐप को डाउनलोड किया था। उस वक्त मैं एक नियमित नौकरी में था, अकाउंटेंट था। नौ से छह की नौकरी, बॉस का चिल्लाना, और महीने के अंत में तनख्वाह जो कभी काफी नहीं होती थी। मैंने सोचा, "क्यों नहीं? बस मनोरंजन के लिए खेल लेता हूँ।" लेकिन जल्द ही मुझे एहसास हो गया कि मैं पैटर्न देख सकता हूँ। ब्लैकजैक में कार्ड्स गिनना, रूले में प्रॉबेबिलिटी। मैंने छोटे दांव लगाने शुरू किए, सिर्फ अपने थ्योरी टेस्ट करने के लिए।
पहले तीन महीने मैं घाटे में था। बुरी तरह घाटे में। मैंने अपनी सैलरी का एक अच्छा हिस्सा गंवा दिया। मेरी पत्नी ने कहा, "यह बंद करो, यह आदत बन जाएगी।" लेकिन मैं जानता था कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं अंधा जुआरी नहीं था, मैं डेटा इकट्ठा कर रहा था। मैंने नोटबुक में हर गेम के नतीजे लिखने शुरू किए। कब जीता, कब हारा, किस टाइम पर खेला, डीलर कौन था। प्रोफेशनल होने का मतलब है खुद पर शक न करना, बल्कि सिस्टम पर शक करना।
और फिर वह दिन आया। मैं रात के 2 बजे उठा, नींद नहीं आ रही थी। vavada app खोला और देखा कि लाइव ब्लैकजैक टेबल पर एक नया डीलर आया है। नए डीलर अक्सर अनुभवहीन होते हैं, वे जल्दी कार्ड बांटते हैं, पैटर्न बनाते हैं। मैंने 5000 रुपए का दांव लगाया। जीता। फिर 10,000 का लगाया। जीता। सुबह तक मैंने 1.2 लाख रुपए कमा लिए थे। उस दिन मैंने ऑफिस जाने के बजाय अपना इस्तीफा लिख दिया।
लोग पूछते हैं, "इतना रिस्क कैसे ले लेते हो?" तो मैं कहता हूँ, रिस्क तब है जब तुम नहीं जानते कि आगे क्या होगा। मुझे पता है। मैं सिर्फ उन मौकों पर खेलता हूँ जहाँ मेरे जीतने की संभावना 51% से ज्यादा हो। बाकी टाइम मैं देखता हूँ, एनालिसिस करता हूँ। यह कोई फिल्म नहीं है जहाँ हर रोज जैकपॉट लगता है। यह एक बिजनेस है। कभी महीने में 50 हजार कमाता हूँ, कभी 2 लाख। लेकिन हार कभी नहीं होती, क्योंकि मैं अपना बैंकरोल मैनेज करता हूँ।
एक बार की बात है, मैं बहुत बड़ा जीत गया था। लगभग 5 लाख एक ही रात में। मैंने सोचा, "चलो आराम करते हैं, अब और मत खेलो।" लेकिन अगले दिन मैंने फिर से ऐप खोला। और हारने लगा। 20 हजार गए, 50 हजार गए। तभी मुझे एहसास हुआ कि लालच सबसे बड़ा दुश्मन है। प्रोफेशनल होने का मतलब है अपनी भावनाओं को काबू में रखना। मैंने तुरंत फोन बंद किया और एक हफ्ते के लिए ब्रेक ले लिया। उस हफ्ते मैंने अपनी स्ट्रैटेजी दोबारा लिखी।
अब मैं रोज सुबह 9 बजे से 12 बजे तक खेलता हूँ। बस तीन घंटे। उसके बाद बंद। मेरे लिए यह एक ऑफिस जॉब की तरह है, बस इसमें बॉस को गाली नहीं देनी पड़ती और कमाई टैक्स फ्री है (हालांकि टैक्स देना चाहिए, पर यह अलग मुद्दा है)। मैंने vavada app पर कई वेरिएशन देखे हैं। कभी सर्वर डाउन हो जाता है, कभी गेम हैंग। प्रोफेशनल होने के नाते मैं घबराता नहीं, बस स्क्रीनशॉट लेता हूँ और सपोर्ट से बात करता हूँ। अगर उनकी गलती से मेरा पैसा फंसता है, तो वे रिफंड करते हैं।
आज मैं उन लोगों को देखता हूँ जो ऐप पर बड़े-बड़े दांव लगाते हैं, शराब पीकर खेलते हैं, और फिर रोते हैं। मैं उनसे कहता हूँ, "भाई, यह खेल है, जुआ नहीं।" फर्क समझो। खेल में तुम नियम जानते हो, जुआ में तुम अंधे हो। मैं अंधा नहीं हूँ। मैं वह आदमी हूँ जिसने अपने शौक को प्रोफेशन बनाया। बाकी लोगों की तरह मैं भी कभी हारता हूँ, लेकिन हार से मैं सीखता हूँ। और सीख ही असली कमाई है।
तो हाँ, जब भी तुम vavada app पर कोई गेम खेलो, तो याद रखना - हर स्पिन के पीछे कोई न कोई मेहनत कर रहा है, पैटर्न ढूंढ रहा है। हो सकता है वो मैं हूँ, या मेरे जैसा कोई और प्रोफेशनल। हम यहाँ सिर्फ किस्मत आजमाने नहीं आए, हम यहाँ अपनी कमाई करने आए हैं। और यही सच्चाई है।